दिपावली में महालक्ष्मी पूजन कैसे करें कि श्रीलक्ष्मीजी दर्शन देने आयेंगी !
हम
सभी को दिपावली या दिवाली में महालक्ष्मी जी की पूजन कैसे करनी चाहिये ? क्या करें और क्या न करें? इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। कुछ सरल उपाय करके हम, श्री महालक्ष्मीजी को प्रसन्न कर सकते हैं। उनकी कृपा प्राप्त कर सकते
हैं। अन्त में मेरे एक सत्य घटना जिसमें श्रीलक्ष्मीजी की वाहन ऊल्लू के कैसे
दर्शन प्राप्त हुआ था यह भी बताऊंगा। आप सभी को दिपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाओं
सहीत स्वागत है। यह हम सभी जानते हैं कि दिवाली पर्व अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक
है साथ ही घर-परिवार में खुशियाँ, समृद्धि और सौभाग्य लेकर
आती है, किन्तु क्या आप जानते हैं कि दीपावली में मैयाजी
अपने भक्तों को दर्शन कैसे देती हैं हां सही सुना आपने भक्तों को माता
श्रीलक्ष्मीजी दर्शन देने घर-घर आती हैं। यह शुभ संकेत का ज्ञान उनकी वाहन ऊल्लू
के दर्शन प्राप्त होना माना जाता है। यदि आपको दिपावली में आपके घर या रसोई घर के छ्त पर ऊल्लू के दर्शन प्राप्त हो जाए। तब जान लिजिए
श्री महालक्ष्मीजी प्रसन्न हैं और आपको कुछ देना चाहती है।
अब
जानते हैं कि दिवाली में की जाने वाली कुछ सरल उपाय क्या क्या है :-
आप दिपावली पूजा में निम्नलिखित उपाय को शामिल कर सकते
हैं :-
- महालक्ष्मी पूजन में कमल फूल या कमल के भाग जैसे पत्ते, कमल गट्टा बीज (पोखरा) के उपयोग करें । कमल फूल की माला, कमल के हरे या काले बीज की माला उत्तम माना जाता है।
- लाल, गुलाबी, हरा, पीले या नीले रंगो से रंगोली बनाए। घर की छ्त पर या आंगन पर या पूजन स्थल पर कमल फूल की रंगोली बनाए। यदि हो सके तो कमल की रंगोली के चारो ओर छोटे-छोटे गमलों से सजाएं।
- महालक्ष्मी पूजन में लाल, गुलाबी, हरा, पीला या नीला रंगो के वस्त्र अर्पित कर, गृहलक्ष्मी, माता जी या बहनों को धारण कराये या दूसरे दिन उस वस्त्र दान भी कर सकते हैं।
- पूजन के समय पांच घी के दीपक जलाकर एक रसोई घर तथा घर के चारों कोनों में रखा जाना चाहिए।
- पूजन स्थल पर छोटे छोटे केले के पत्ते से सजावट करके, श्रीमहालक्ष्मीजी के आगे कलश, गौरी-गणपती स्थापित कर रात भर ज्योत जलाएं । फल, फूल, हरी दूब, धूप, दीप, मिठाई अर्पित करना चाहिए।
- महालक्ष्मी पूजन प्रथम पहर, मध्य रात्रि तथा तीसरे पहर में धूप, दिप से तीन बार पूजा कर महालक्ष्मी जी के 108 नाम जाप करना चाहिए। चाहे तो कोई एक नाम को ही 108 बार जाप कर सकते हैं।
- गृहलक्ष्मी, माताजी, बहनों को यथोचित नवीन वस्त्र, आभूषण, रूप श्रृंगार धारण कर, स्वच्छ मन ( स्त्री-पुरूष मन की शुध्द्ता अध्यात्मिक जगत में अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है ) से पूजन करना चाहिए।
- दिपावली में पटाखे न के समान जलाना चाहिए क्योंकि इससे धन महालक्ष्मी रूठ जाती है, धुंए और तेज आवाज़ से घर के वातावरण प्रदूषण युक्त होने के कारण श्रीलक्ष्मीजी नाखुश हो जाती है।
क्या न करें:
- परिवार के सभी सदस्य आपस में द्वेष, छींटाकशी, आपसी मनमुटाव न करें, क्योंकि इससे मन शुद्ध नहीं हो पाता है।
- दिवाली पर मांस न खाएं, मंदिरा पान न करें, जुआं न खेलें इससे भारी धन की हानि के साथ साथ पारिवारिक क्लेश बढ़ते हैं ।
- गृहलक्ष्मी से कठोर वचन नही बोले और काम वासना से दूर रहना चाहिए।
- दिवाली पर रात में जूठे बर्तन न रखें, हो सके तो वर्ष भर रात में जूठे बर्तन न रखें।
- जल टपकता हुआ टेप नल न रखें ।
- घर के मुख्य द्वार पर जूता-चप्पल बिखरा हुआ नहीं होना चाहिए। इसे उचित स्थान में रख कर साफ़ कपड़े से ढंक दें।
अब मैं अपने गांव की सत्य कथा सुनाता हूं सन् 1999 की बात है मैं रात भर दीपक जलाकर महालक्ष्मी जी पूजा किया कर रहा था। अपने टैरिस गार्डन में कमल रंगोली बनाकर उसे गेंदे आदि फूलों सजाया था। लगभग तीसरे पहर की पूजा से पहले सभी दीपकों में तेल डाल रहा था। तभी एक ठंडी हवा के झोंको ने मुझे कंपित कर दिया और मेरे आसपास एकअलग सी खुशबू फैल गई। मैं 18 वर्ष था किन्तु गहरी रात में डर सा गया। मैनें तय किया कि जल्दी ही बाकी दीया में तेल लगा देता हूं और नीचे जाकर पूजा करूंगा। श्रीमहालक्ष्मी जी के वाहन उल्लू के आवाज़ सुनकर, जब मैंने ऊपर की ओर देखा तो छ्त पर बैठा पाया, जो बहुत सुंदर, बड़ा आकार,जिनके चारोन ओर दिव्य प्रकाश हो रहा था। मैंने अपनी जीवन में इतने बड़े उल्लू कभी भी नहीं देखा। बस मैं देखते ही रहा और कुछ भी बोल न पाया । थोड़ी ही देर में आंखों से आंसू बहने लगा जिसके ठंड से शरीर और भी ठंडा होने लगा। मैं आंखें बंद कर महालक्ष्मी जी को प्रणाम किया। तन मन में एक अलग सा अनुभव होने लगा । ऐसा लगता था कि मेरे शरीर में अनंत ऊर्जा समा रही थी । तन आनंदित, थकान रहित हो गया था। छत से नीचे आ गया। ये सब शुद्ध प्रेम, सरल मन, द्वेष रहित, सहज प्राकृत जीवन जीने के कामना करने से हो पाया ऐसा मैं समझता हूं। इस दिवाली पर ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ आप सदैव सपरिवार संपन्न आनंदित जीवन जीते रहे।
Nice blog I like to read your blogs sir😊
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